"मिथिला के छात्र
और क्षेत्र का सर्वांगिन विकास यही हमारा उद्येश्य.."
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हमारे बारे में अहम जानकारियां

 

*हमारा गठन कब हुआ ?

मिथिला स्टूडेंट यूनियन का गठन जनवरी 2015 में हुआ ।

*यह किस तरह का संगठन है ?

यह भारतीय संविधान और कानून के तहत सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट के प्रावधानों के अन्तर्गत निबंधित संस्था है। यह पूर्णतः गैर राजनीतिक और गैर लाभकारी संस्थान है जिसका उद्देश्य मैथिल छात्र और मिथिला का संपूर्ण विकास है।

*मिथिला और मैथिली के नाम पर अनेक संस्थाओं के होते हुए भी एक नई संस्था MSU का जन्म क्यों हुआ ?

इसका जवाब पाने के लिए कुछ सवाल अपने आप से पूछिए

1. अनेक संस्थाओं के होते हुए भी मिथिला की छवि क्या है ?

2. मिथिला और मैथिल हित के नाम पर चलने वाली अधिकांश संस्थाओं की छवि और विश्वसनीयता कितनी है ?

3. क्या आप इन संस्थाओं पर भरोसा करते हैं ?

4. क्या मिथिला एक विकसित क्षेत्र है ?

5. क्या मिथिला के लोग अन्य प्रांतो की तरह अपनी भाषा और अपनी संस्कृति के रूप में एक अलग पहचान रखते हैं और इस पर गर्व करते हैं ?
इन सभी सवालों का समाधान ढूंढने और मिल कर प्रयास करने के लिए मिथिला स्टूडेंट यूनियन की ओर से एक नई कार्य संस्कृति विकसित की जा रही है। आप इसके सहभागी बन सकते हैं।

*यह अन्य संगठनों से अलग किस तरह है ?

मिथिला स्टूडेंट यूनियन का विश्वास केवल बोलने में नहीं काम करने में है। जनवरी 2015 में गठन के छह महीनों के दौरान हमारे काम को देखिए । हम कर दिखाते हैं। (http://www.mithilastudentunion.com/Our_Work.html )

*हमारे सहयोगी कौन हैं ?

मिथिला और मैथिली से सहानुभूति रखने वाले सभी लोग हमारे सहयोगी हैं।

*इसका उद्देश्य क्या है ?

मिथिला का संपूर्ण विकास ताकि शिक्षा और रोजगार के लिए दर-दर भटकने और पलायन के लिए अभिशप्त मिथिला के तमाम लोगों को अपने क्षेत्र में हर सुविधा मिले और वे देश के विकास में मजबूती के साथ अपनी भागीदारी निभा सकें।
अलग-अलग धर्म, पंथ, जाति, गोत्र, कुल, मूल और गांव के झूठे मकड़जाल में फंसे लोग एक मैथिल- एक मिथिला की पहचान बनाएं और यहां के वासी अपनी सामूहिक पहचान से पूरी दुनियां में जाने जाएं।

मिथिला का संपूर्ण विकास ताकि शिक्षा और रोजगार के लिए दर-दर भटकने और पलायन के लिए अभिशप्त मिथिला के तमाम लोगों को अपने क्षेत्र में हर सुविधा मिले और वे देश के विकास में मजबूती के साथ अपनी भागीदारी निभा सकें।
अलग-अलग धर्म, पंथ, जाति, गोत्र, कुल, मूल और गांव के झूठे मकड़जाल में फंसे लोग एक मैथिल- एक मिथिला की पहचान बनाएं और यहां के वासी अपनी सामूहिक पहचान से पूरी दुनियां में जाने जाएं।